जिसने खोजा, उसी ने पाया - आत्मबोध - Series Video 3#viralvideo
For Watching Full Video and Details About Courses
Visit My You Tube Channel
Mindful Journey Dr. Gunjan Vishwakarma.
For Personal Session
and
Enquiry What's App at +91-7424830300
"जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरी डूबन डरी, रही किनारे बैठ॥"
"जिन खोजा तिन पाइया" का शाब्दिक अर्थ है —
"जिसने खोजा, उसी ने पाया।"
यह कहावत हमें यह सिखाती है कि जो व्यक्ति सच्चाई, ज्ञान या ईश्वर की खोज में ईमानदारी और साहस के साथ गहराई में उतरता है, वह ही उसे प्राप्त करता है। जबकि जो लोग डर के कारण किनारे बैठे रहते हैं, वे कभी गहराई का अनुभव नहीं कर पाते और कुछ भी हासिल नहीं कर पाते।
व्यापक अर्थ में:
जिन्होंने प्रयास किया, उन्होंने पाया।
जो रिस्क लेते हैं, वही सफलता पाते हैं।
गहराई में जाने पर ही असली मोती मिलते हैं।
यह दोहा आध्यात्मिक साधना, जीवन की समस्याओं के समाधान, और आत्मिक विकास — तीनों पर लागू होता है। कबीरदास जी के अनुसार, सिर्फ सतह पर तैरने से ज्ञान या सच्चाई नहीं मिलती; उसके लिए भीतर उतरना होता है।
कुछ लोगों का मानना है कि हम जिंदगी की दौड़ में पीछे रह गए हैं या हम सभी को कुछ अच्छा नहीं मिला है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
हर व्यक्ति की आगे बढ़ने की क्षमता समान है।
यदि ज्ञान मिल जाए तो कोई भी आगे निकल सकता है। सही सूचना आपको आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।
अपने ज्ञान को बढ़ाना शुरू करें। ऐसा नहीं है कि हमको सब कुछ पता है और ऐसा भी नहीं है कि हमको कुछ नहीं पता है।
लेकिन अगर आप अपना ज्ञान प्राप्त करने की यात्रा में बने रहें तो आप उन गुने चुने हुए लोगों में आ जाएंगे जो अपने जीवन के उपदेशों को पा लेंगे।
और ज्ञान या सूचना कि जब हम बात करते हैं तो सभी तरह का ज्ञान उपलब्ध है, कैसे अपने काम में लेते हैं ये सब आप पर निर्भर करता है। तो मानव जीवन का समय ना बर्बाद करते हुए अपना समय ज्ञान प्राप्ति में लगाइए और उस ज्ञान के उपयोग से अपने जीवन को बेहतर बनाइए।
Comments
Post a Comment